परमेश्वर की सिद्ध इच्छा की परख करना

द्वारा लिखित :    जैक पूनन श्रेणियाँ :   चेले साधक
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जब कोई ऐसा मसला सामने आए, जिसके बारे में हम सुनिश्चित ना कर पाएं कि यह परमेश्वर की इच्छा है या नहीं है, तब अच्छा होगा कि हम खुद से बारह सवाल पूँछे। हम जैसे-जैसे इन सवालों का ईमानदारी से जवाब देंगे वैसे-वैसे यह तेजी से स्पष्टa होता चला जाएगा कि परमेश्वर की इच्छा क्या है।

• जहाँ तक मुझे ज्ञात है, क्या यह यीशु और प्रेरितों की शिक्षाओं, या नए नियम की भावना के विपरीत है? (2 तीमिथियुस 3:16, 17)

• क्या यह कुछ ऐसा है जिसे मैं एक मुक्त विवेक के साथ कर सकता हूँ? (1 यूहन्ना 3:21)

• क्या यह कुछ ऐसा है जिसे मैं परमेश्वर की महिमा के लिए कर सकता हूँ? (1 कुरिन्थियों 10:31)

• क्या यह कुछ ऐसा है जिसे मैं यीशु की सहचारिता में सकता हूँ? (कुलुस्सियों 3:17)

• क्या ऐसा करते समय मैं परमेश्वर से मुझे आशीष देने की प्रार्थना कर सकता हूँ? (2 कुरिन्थियों 9:8)

• क्या ऐसा करना किसी भी प्रकार से मेरी आध्यात्मिक स्थिति को कुंठित कर देगा? (2 तीमिथियुस 2:15)

• मेरी जानकारी के आधार पर क्या यह आध्यात्मिक रूप से लाभदायक और सदुदाहरण होगा? (1 कुरिन्थियों 6:12; 10:23)

• क्या मैं प्रसन्न होऊंगा यदि इसे उस समय करते पाया जाऊं जब यीशु पृथ्वी पर लौटेंगे? (1 यूहन्ना 2:28)

• विद्वान और अधिक परिपक्व भाइयों का इसके बारे में क्या विचार है? (नीतिवचन 11:14; 15:22; 24:6)

• क्या मेरा ऐसा करना परमेश्वर के नाम का अनादर कर देगा या जब दूसरों को इसके बारे में पता चलेगा तो क्या यह मेरी प्रभु की गवाही को बिगाड़ देगा? (रोमियो 2:24; 2 कुरिन्थियों.8:21)

• यदि दूसरे इसके बारे में जान जाएँ तो क्या मेरा ऐसा करना उनके ठोकर खाने का कारण बनेगा? (रोमियो 14:13; 1 कुरिन्थियों 8:9)

• ऐसा करने में क्या मैं स्वयं को अपनी आत्मा में मुक्त महसूस करता हूं? (1 यूहन्ना 2:27)

इन वचन सन्दर्भों को देखें और उन पर ध्यान लगाएं।