सांसारिकता से मन-फिराओ - और पवित्र आत्मा का बपतिस्मा प्राप्त करो

द्वारा लिखित :    जैक पूनन श्रेणियाँ :   चेले साधक
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(फरवरी 2012 में एक पेंटेकोस्टल कलीसिया में दिए गए एक संदेश से)

परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं और उनकी आज्ञाएं दो पैरों के समान हैं, जिनपर हमें खडे रहना है और जिनके साथ हमें चलना है। यदि आप केवल प्रतिज्ञाओं से ही जीवन जीने की कोशिश करेंगे, तो ऐसा करना सिर्फ एक पैर के साथ चलने की समान हो जाएगा। आप सभी प्रतिज्ञाओं का अनुभव नहीं कर सकेंगे और आप आत्म-छलावे में जीवन जिएंगे। दूसरी ओर, यदि आप केवल आज्ञाओं द्वारा जीने की कोशिश करेंगे तो प्रतिज्ञाओं के ना होने के कारण आप आज्ञा का पालन करने में सक्षम नहीं होंगे - और आप उदास और निराश हो जाएंगे। तो हमें आज्ञाओं और प्रतिज्ञाओं दोनों की ही जरूरत होती है।

लेकिन जब तक आप पवित्र-शास्त्र का अध्ययन ध्यान से नहीं करेंगे, तब तक आप yये कभी नहीं जान सकेंगे कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं और उनकी आज्ञाएं क्या हैं। यदि आप केवल पासवानों और टेलीविजन के माध्यम से प्रचार करने वाले प्रचारकों मात्र को ही सुनेंगे, तब आप परमेश्वर के वचन की पहचान नहीं कर पाएँगे, क्योंकि वे अक्सर परमेश्वर के वचन को बिल्कुल सही रूप से उद्धृत नहीं करते हैं या उनकी आज्ञाओं के बारे में बिल्कुल सही रूप से नहीं सिखाते हैं। तो आप को परमेश्वर के वचन का अध्ययन अपने आप ही करना होगा। यदि आप एक मसीही हैं तो आपको दुनिया की किसी भी अन्य पुस्तक की तुलना में बाइबल को बेहतर रूप से जानना चाहिए। यदि आप बाइबल का अध्ययन करने में ज्यादा आलस बरतेंगे, तो आपका मसीही जीवन निरंतर खोखला बनता चला जाएगा। हो सकता आपको ऐसा भी लगता हो कि आप नए सिरे से जन्म पा चुके हैं, जबकि ऐसा ना हो। हो सकता हैं आप कल्पना कर रहे हों कि आप पवित्र आत्मा के साथ भरे हैं - जब कि वो सब जो आप को मिला था वह केवल एक नकली अनुभव था। परन्तु यदि आप परमेश्वर के वचन का अध्ययन करंगे तो आप कभी धोखा नहीं खाएँगे।

जो लोग परमेश्वर के वचन का अध्ययन नहीं करते वे धोखे के योगय होते हैं - क्योंकि वे परमेश्वर से कहते हैं कि, "मैं जनता हूं कि आपने मनुष्य के लिए एक पुस्तक लिखी है, लेकिन मेरे पास इसे पढ़ने के लिए समय नहीं है"। - मेरे पास करने के लिए कई और अधिक महत्वपूर्ण बातें हैं जैसे टेलीविजन देखना और इंटरनेट पर सर्फिंग करना। तो मैं केवल रविवार की सुबह ही आप को थोड़ा सा समय दे सकता हूं"। यदि परमेश्वर के वचन के प्रति आपका यही रवैया है, तो फिर आप शायद नए सिरे से नहीं जन्में हैं। सभी स्वस्थ बच्चे हर दिन दूध के लिए रोते हैं। और सभी नए सिरे से जन्में लोग प्रतिदिन मसीह के वचन के दूध के लिए लालायित रहते हैं (1 पतरस 2:2) । मैं इस बारे में आपसे सच बोलना चाहता हूं, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि न्याय के दिन आप मुझ पर आपसे सत्य ना कहने का आरोप लगाएं । कई साल पहले प्रभु ने मुझसे कहा कि यदि मैं लोगों से प्यार करता हूं, तो मुझे, यदि वे इसे स्वीकार ना भी करें तो भी, उन्हें सच्चाई बतानी होगी।

परमेश्वर के वचन में कई अद्भुत प्रतिज्ञाएँ हैं। नई नियम में पुराने नियम से भी अधिक अद्भुत प्रतिज्ञाएँ है। इन्हें 'महान और बहुमूल्य वरदान' कहा जाता है (2 पतरस 1:4)। यदि आपको यह पता चले कि आपके घर के एक कोने में, जमीन के नीचे अनमोल खजाना छिपा हुआ है, तो उस खजाने की खोज में आप कितना समय लगा देंगे। जब आप यह जान जाएँगे कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ किसी भी सांसारिक खजाने से अधिक कीमती हैं, तब आप उन प्रतिज्ञाओं को पाने के लिए उन्हें परमेश्वर के वचन में से ढूँढ कर खोज निकालेंगे।

जुलाई 1959 में मैंने अपना जीवन पूरी तरह से मसीह के लिए दे दिया था। उसके बाद अगले साल सात मैंने परमेश्वर के वचन का अच्छी तरह से अध्ययन करने में बिताए। मैं किसी बाइबल स्कूल नहीं गया। उन 7 वर्षों के दौरान मैं नौसेना में कार्यरत था। जब भी मैं ड्यूटी पर नहीं होता था मैं अपने केबिन में बैठ जाता था और परमेश्वर के वचन का अध्ययन करता था। इसने मेरे जीवन की दिशा को बदल दिया। मैंने बाइबल में कई अद्भुत प्रतिज्ञाओं को खोज निकाला - और उनका दावा किया, और वे स्वर्ग की आत्मा को मेरे जीवन में उतार लायीं।

विवाहित होने पर, परमेश्वर का वचन स्वर्ग की आत्मा को मेरे घर में भी ले लाया। बाद में, मेरी पत्नी और मैंने अपने चार बच्चों के लिए भी परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर दावा किया। हमने उन्हें उनकी आज्ञाओं को मानना भी सिखाया। जिसके परिणामस्वरूप, वे सभी आज प्रभु का अनुसरण कर रहे हैं। परमेश्वर चाहते हैं कि हम उनकी प्रतिज्ञाओं द्वारा बिल्कुल वैसे जीवन जिएँ जिस तरह हम अपने बैंक खाते में रखे धन के साथ जीते हैं। जिस कंपनी में आप कार्यरत हैं यदि वह आपको बोनस देती है तो क्या आप उसे स्वीकार नहीं करेंगे? यदि फिर वे आपको यह बताएं कि बोनस का पैसा आपके बैंक खाते में जमा किया गया है, तो क्या आप उस पैसे को देखने के लिए अपने खाते की जाँच नहीं करेंगे? अधिकतर मसीही लोग परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर दावा करने की बजाय बेसब्री से उनके बैंक खातों की ही जाँच करते रह जाते हैं - और यही कारण है कि उनके जीवन खोखले हैं।

परमेश्वर की आज्ञाएं और उनकी प्रतिज्ञाएं एक साथ मिलकर हमें आध्यात्मिक रूप से धनी बना सकती हैं। अगर हम वास्तव में इस बात पर विश्वास रखते हैं, तो हम अपने पूरे मन के साथ उन सभी को खोजने के लिए आतुर बन जाएँगे। हम सभी के पास जीने के लिए केवल एक ही जीवन है और हमारे जीवन का एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए। यदि मरणोपरांत स्वर्ग जाना ही हमारा उद्देश्य है, तो एक दिन जब हम यहोवा के सामने खड़े होंगे तब हमें बहुत अफसोस होगा।

मैं आपको बताना चाहता हूं कि मेरे जीवन में मेरा उद्देश्य क्या है। मेरी यह प्रार्थना है: "हे प्रभु, इससे पहले कि मैं इस पृथ्वी को छोड़ कर जाऊं, मैं आपकी नई वाचा में मसीहियों के लिए दी गई हर एक आज्ञा का पालन करना चाहता हूँ। जिन आज्ञाओं को आपने इस्त्राएलियों के लिए दिया है उनसे मेरा कोई सरोकार नहीं है। लेकिन इस पृथ्वी को छोड़ने से पहले मैं उन सभी आज्ञाओं का पालन करना चाहता हूँ जो आपने नए सिरे से जन्में मसीहियों के लिए दीं हैं। और इस पृथ्वी को छोड़ने से पहले मैं उस हर प्रतिज्ञा पर अपना दावा करना चाहता हूँ जो आपने नई वाचा के मसीहियों लिए दीं हैं"।

ये कुछ इस तरह है कि मेरी इच्छा है कि मेरे सभी बच्चे अपने कॉलेज के सभी पाठ्यक्रमों को पूरा कर लें। यदि मेरे बेटों में से कोई एक भी अपने पाठ्यक्रमों का केवल आधे भाग को ही पूरा करे तो मुझे संतुष्टि नहीं मिलेगी। ठीक उसी तरह, मैं भी पृथ्वी पर अपनी आध्यात्मिक शिक्षा में हर पाठ्यक्रम को पूरा कर लेना चाहता हूँ।

ससार में आज महान त्रासदी यह है कि वे विश्वासी जिन्हें स्वर्गीय स्वभाव में रहना चाहिए वे सांसारिक मानव स्वभाव के वश में अधिक रहते हैं - और आत्मा से भरे होने का दावा करने वाले लोगों और अन्य लोगों के बीच कोई अंतर नहीं रह गया है। दोनों ही सांसारिक स्वभाव रखते हैं। दोनों को धन से प्रेम है और दोनों मनुष्य के आदर-सम्मान की लालसा रखते हैं। "आत्मा से भरे" होने का दावा करने वाले मसीहियों को संबोधित कर परमेश्वर अब यह कहते हैं, 'अपने सांसारिक स्वभाव से मन फिराओ'।

प्रभु यीशु मसीह के अग्रदूत के रूप में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने लोगों से प्रभु के लिए मार्ग तैयार करने को कहा। और जब हम यीशु मसीह को हमारे जीवन में आने के लिए आमंत्रित करते हैं, तो हमें भी पहले यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के संदेश का पालन करना चाहिए, जो यह था,"मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है" (मत्ती 3:2)। हमारे जीवन के प्रभु यीशु मसीह के लिए हम केवल इसी प्रकार "मार्ग तैयार कर सकते हैं"।

यूहन्ना वहाँ वास्तव में क्या कह रहे थे? वे इस्त्राएलियों से कह रहे थे कि "पिछले 1,500 सालों से, मूसा के समय से तुम सांसारिक बातों में व्यस्त रहे हो। तुम्हारी बाइबल में हर प्रतिज्ञा अब सांसारिक चीज़ों के बारे में है। वहाँ उत्पत्ति से मलाकी तक तुम्हारे लिए स्वर्गीय आशीष की एक भी प्रतिज्ञा नहीं है। हर प्रतिज्ञा केवल सांसारिक आशीष की है - कि तुम आर्थिक रूप से धनवान हो जाओगे, कि तुम्हारे खेत और व्यवसाय आशीषित होंगे, कि तुम्हारे सांसारिक शत्रु पराजित होंगे और तुम्हारी ही तरह तुम्हारे बच्चे भी आशीषित होंगे, कि तुम्हें रोगों से चंगाई मिल जाएगी। अब मन फिराओ - घूम जाओ। उन सांसारिक आशीषों को पाने की अभिलाषाओं से मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य आ रहा है। कोई है जो स्वर्ग से आ गया है जो तुम्हें पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देगा और तुम्हारे दिलो में स्वर्ग ले आएगा। परन्तु वह ऐसा केवल तभी कर सकता है, जब तुम सांसारिक चीजों के पीछे भागना छोडो और मन फिराओ"। यूहन्ना का सन्देश मूलतः यही था। और इससे पहले कि हमें पवित्र आत्मा में बपतिस्मा दिया जा सके हमें भी आज इसी सन्देश का पालन करने की जरूरत है।

स्वर्ग से पवित्र आत्मा हमारे दिलों में स्वर्ग का वातावरण लाने के लिए आया है। वास्तविक रूप से आत्मा से भरे किसी मसीही का प्राथमिक चिन्ह है कि वह स्वर्गीय स्वभाव का होगा औरनाकि सांसारिक स्वभाव का। उसके इर्द-गिर्द स्वर्ग की सुगन्ध सी होगी। क्या कोई ऐसा व्यक्ति जो अपना आपा खो देता हो और अपने पति या पत्नी पर चिल्लाता हो कह सकेगा कि वह पवित्र आत्मा से भरा हुआ है? इस तरह की क्रोध की भावना किसी अन्य आत्मा से आती है, ना कि पवित्र आत्मा से। स्वर्ग में, कोई भी क्रोध नहीं करता।

मैं जानता हूँ कि जब परमेश्वर ने मुझे पवित्र आत्मा से भरा तो मेरे अपने जीवन में क्या हुआ था। नए सिरे से जन्में होने भी, मेरे अन्दर आदम का स्वभाव था (बाइबल जिसे "शरीर" कहती है) जो मुझ पर हावी थी। हालांकि जब मसीह की आत्मा ने मुझे भरा, तब उसने थोड़ा-थोड़ा करके मुझे मसीह की समानता में बदलने की प्रक्रिया को मुझमें शुरू कर दिया। आत्मा से भरे मनुष्य का यीशु मसीह सर्वोतम उदाहरण है और परमेश्वर हमें पूरी तरह से उन्हीं के समान बना देना चाहते हैं।

यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने कहा, "परमेश्वर का यह मेम्ना पहले तुम्हारे सभी पापों को उठा ले जाएगा"। दूसरे शब्दों में पहले वह तुम्हारे प्याले को साफ कर देगा। लेकिन वह तुम्हारे प्याले को खाली नहीं छोड़ेगा। वह तुम्हारे प्याले को भर देगा। वह तुम्हारे के दिल को साफ करेगा जिससे कि वह तुम्हें अपनी आत्मा के साथ भर सके, और फिर जीवन के जल की नदियां तुम्हारे भीतर से बाहर बहने लगेंगी।

पुराने नियम में भी लोगों को "पवित्र आत्मा के साथ भरा गया था"। लेकिन वह नई वाचा के भरने के समान नहीं था। (यूहन्ना 7:39) में बाइबल कहती है कि जब तक यीशु महिमावंत ना बने तब तक पवित्र आत्मा वैसे नहीं दी जा सकती थी जैसे इस 'नई वाचा' में दी जाती है।

मैं इस अंतर को समझाता हूं। यदि आप एक प्याले को उल्टा रखेंगे और उस पर पानी डालते रहेंगे, तो प्याले के उपर से पानी कई दिशाओं में बहता चला जाएगा। पुरानी वाचा के तहत यह, परमेश्वर द्वारा उनकी आत्मा को अपने दासों पर उड़ेले जाने की और इस माध्यम से हजारों के आशीषित होने की, एक तस्वीर प्रस्तुत करता है। परमेश्वर का आत्मा गिदोन और शिमशोन और शाऊल और दाउद पर आया - और वे इस्त्राएलियों को उनके दुश्मनों से बचाने के लिए परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए गए। लेकिन यदि आप उनके दिल (उनके प्याले) के अंदर झांकेंगे, तो पाएँगे कि वे पापी और गंदे थे। प्याले उल्टे थे। उनके दिल के अंदर व्यभिचार और मूर्ति पूजा थी।

परमेश्वर का आत्मा जब गिदोन (न्यायियों 6:34) पर आया था, तब उसने इस्राएल को मिद्यानी लोगों से बचा लिया था। लेकिन परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल हुए जाने के बाद भी उसने मूर्तियाँ बनाईं और उनकी आराधना करना शुरू कर दिया (न्यायियों 8:24-27)। उसके प्याले का भीतरी भाग गंदा था। शाऊल और दाउद के दिल भी गंदे थे - दूसरे तरीकों में।

लेकिन पिन्तेकुस्त के दिन, पर परमेश्वर ने प्याले को सीधा खड़ा कर के रख दिया और आत्मा को प्याले (दिल) में उंडेल दिया और पहले इसे अंदर से साफ किया और तब इसे भर दिया। तब "अंतरात्मा से" जल बहने लगा (यूहन्ना 7:38)। जैसा कि प्रभु ने उन से कहा था, उस दिन तक, पवित्र आत्मा केवल 'उनके साथ' था। लेकिन उस दिन के बाद से, वह 'उन के भीतर'आ गया था (यूहन्ना 14:17)। पुरानी वाचा के पवित्र आत्मा के अनुभव में और नई वाचा के पवित्र आत्मा के अनुभव के बीच का अंतर यही है।

इसलिए आज यदि एक प्रचारक, परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए जाने के बाद भी व्यभिचार में, गिर जाता है तो यह साबित होता है कि वह परमेश्वर का नई-वाचा का दास बिल्कुल भी नहीं था। वह मात्र पुरानी-वाचा का एक प्रचारक था, जिसके ऊपर-ऊपर से आत्मा बह रही थी और उसकी अंतरात्मा से" नहीं क्योंकि उसका दिल अभी भी स्त्रियों का लोभी था। किसी धन-प्रेमी प्रचारक का दिल भी गंदा है - क्योंकि मसीह की आत्मा धन से प्रेम नहीं रखती। जो धन से प्रेम रखता है वह आत्मा-भरा व्यक्ति नहीं हो सकता। परमेश्वर ऐसे प्रचारकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन यह प्याले के उपर से पानी बहने के समान ही होगा जबकि उसका अंतर्मन अपरिवर्तित बना रहेगा। ऐसे प्रचारक वे हैं जिनके विषय में यीशु ने कहा, कि वे अंतिम दिनों में उनके पास आएँगे और जो अपनी सेवकाई में अपनी उपलब्धियों की डींग हांकने वाले होंगे। परन्तु तो भी प्रभु उन्हें नरक में भेज देगा (मत्ती 7:22, 23)।

जब आप परमेश्वर से आप को पवित्र आत्मा के साथ भरने के लिए कहते हैं तो आप क्या अपेक्षा रखते हैं? क्या आप चाहते हैं कि परमेश्वर आप का इस्तेमाल करें, या आप चाहेंगे कि वे आप को पहले शुद्ध करें? यदि आप परमेश्वर द्वारा केवल भविष्यद्वाणी करने के लिए या बीमारों को चंगा करने आदि के लिए इस्तेमाल होना चाहते हैं, तो आप वास्तव में पुरानी वाचा में वापस जा रहे हैं।

बतशेबा के साथ पाप कर लेने के बाद, दाउद ने अपने पाप का अंगीकार करने के लिए एक भजन लिखा था। लेकिन भजन 51 में थोडी बहुत अभिव्यक्ति ही ऐसी है जो क्षमा प्राप्ति से बड़ कर कुछ अधिक पाने की उनकी लालसा को व्यक्त करती हो - कुछ ऐसा पाने की जो शायद उनके पास नहीं था। परमेश्वर ने उन्हें कई मायनों में इस्तेमाल किया था। लेकिन वह कहते हैं, 'हे प्रभु, मैं जनता हूँ कि तू सबसे पहले ह्रदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है"(भजन संहिता 51:6)। यहाँ सच्चाई का अर्थ वास्तविकता है! दाउद जानता था कि परमेश्वर उसके आंतरिक जीवन के पारदर्शी और वास्तविक होने से ही प्रसन्न हो सकते थे। लेकिन उसके साथ तो ऐसा नहीं था। उसने ऐसे जीवन की लालसा तो रखी लेकिन yपुरानी वाचा के तहत वह ऐसा नहीं कर सका। क्या आप ऐसे जीवन की अपने लिए लालसा रखते हैं? जब किसी व्यक्ति का बाहरी जीवन तो शुद्ध होता है लेकिन असका आन्तरिक जीवन नहीं, तो वह एक पाखंडी है। वह जीवन को पुरानी वाचा के तहत जी रहा होता है।

यीशु में यूहन्ना 7:38 में कहा कि, जो लोग नई वाचा में पवित्र आत्मा प्राप्त करते हैं उनकी "अंतरात्मा से" स्वच्छ जीवन के जल की नदियाँ फूट पड़ेंगी"। यहाँ महत्वपूर्ण बात नदियाँ नहीं है परन्तु वह जगह है जिसमें से वे फूटती हैं - "अंतरात्मा से"। भजन 51 में इसी अभिव्यक्ति का दाउद ने प्र्योग किया था। अंतरात्मा प्याले के भीतर का भाग है। दाउद ने परमेश्वर की आशीषों को केवल उस के ऊपर से होकर बहने का अनुभव किया था। क्या आपके जीवन में भी ऐसा ही है? क्या आप का पवित्र आत्मा का अनुभव नयी-वाचा के अनुरूप है या पुरानी-वाचा के? आप को वही प्राप्त होता है जिसकी आप वास्तव में कामना करते हैं! जो आप मांगेंगे, उसे ही आप प्राप्त करेंगे। यदि आपकी एकमात्र प्रार्थना यही है कि, "परमेश्वर मुझे इस्तेमाल कीजिए", तो वह आप का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन आप एक उल्टे रखे प्याले की तरह हो जाएंगे जो भीतर (हृदय) से सदा पापी और गंदा रहेगा। वह आप के माध्यम से एक महान सेवकाई को पूर्ण कर सकते हैं - लेकिन आप शिमशोन की तरह होंगे, अपने ह्रदय में पाप वासना से भरे। आप क्या यही चाहते हैं? यह तो नई वाचा के पवित्र आत्मा की परिपूर्णता नहीं है।

यदि आप पुरानी वाचा में रहते हैं, तो आपकी अंतरात्मा में वास्तविकता नहीं हो सकती। मुझे यह अपने अनुभव से पता है। नए सिरे से जन्में होने के बाद मैंने परमेश्वर से यह प्रार्थना की, कि वे मुझे प्रचार करने का सामर्थ दें और मेरा इस्तेमाल करें। और परमेश्वर ने मुझे इस्तेमाल किया भी था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता चला गया, मैंने पाया कि मेरा प्याला भीतर से गंदा था।

दाउद और शिमशोन की तरह मैं भी जीवन भर इसी तरह, रह सकता था क्योंकि पानी मुझ पर से बह तो रहा ही था और दूसरों को आशीष भी मिल रही थी। दुनिया के कई भागों में आयोजित सम्मेलनों में मेरे प्रचार से और मेरे रेडियो प्रोग्रामों और पुस्तकों के माध्यम से कई हजारों लोग आशीष पा रहे थे। लेकिन मेरा अपना अंतर्मन गंदा था, और पाप पर मेरी विजय नहीं हुई थी। मैं एक पाखंडी था। और मैं दाउद की तरह रोया,"हे परमेश्वर, तू सबसे पहले ह्रदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं है"। मैं अपनी हालत से खुश बिल्कुल नहीं था। मैं नई-वाचा की पवित्र आत्मा के अनुभव की कामना करने लगा। मैंने प्रचार करना छोड़ देने का फैसला किया क्योंकि मैं एक पाखंडी था। और वही समय था कि जब परमेश्वर ने मुझ जैसे पापी से उनकी महान दया और करुणा में मुलाकात की और मुझे पवित्र आत्मा और आग में बपतिस्मा दिया।

आग क्या करती है? वह शुद्ध कर देती है। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने इस्राएलियों को बताया, "मैं तो बस आपको पानी में बपतिस्मा दे सकता हूँ। लेकिन यीशु आपको आग में बपतिस्मा दे सकते हैं"। और वही आग आपके जीवन को शुद्ध करेगी और उसके जैसा शुद्ध कोई और नहीं कर सकता।

जब लोग मुझसे आकर कहते हैं कि मैं पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाने के लिए अपने हाथ उन पर रखूँ। तो मैं उन्हें बताता हूँ कि "अगर मैं अपने खाली हाथ उनके सिर पर रखूंगा तो कुछ नहीं होगा। उसके बाद भी आप जैसे पहले थे वैसे ही खाली रह जाएँगे। मुझसे भी बड़कर एक और सामर्थ्यवान है। अकेले वही आपको पवित्र आत्मा और आग में बपतिस्मा दे सकते हैं। यीशु के पास जाओ"।

यह यीशु ही थे जिन्होंने मुझे पवित्र आत्मा और आग में बपतिस्मा दिया था। यह यीशु ही थे जिन्होंने मेरे मनफिराव के 16 साल बाद, मेरे प्याले को सीधा खड़ा कर दिया और मेरी अंतरात्मा को भर दिया और वहाँ से नदियों को बहाते चले गए। आपके लिए भी वे ऐसा ही कर सकते हैं। परमेश्वर के साथ कोई पक्षपात नहीं है। तो आज ही उन्हीं के पास चले जाओ।

लेकिन जैसा कि हमने पहले देखा है, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला ने लोगों से कहा था कि पृथ्वी के राज्य से मन फिराओ (मती 3:2)। यह यीशु, जो पवित्र आत्मा और आग में बपतिस्मा देता है स्वर्ग के राज्य को हमारे जीवन में लाना चाहते हैं। "मन-फिराओ" शब्द एक सैन्य आदेश के शब्द के समान है "पीछे मुड़" (या 'पीछे मूंह कर')। इसका मतलब है लगभग 180 डिग्री घूम कर और विपरीत दिशा के सामने मुंह कर के खड़े हो जाना। यदि हम पवित्र आत्मा की वास्तविक परिपूर्णता को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें सांसारिक आशीषों की मांग करने से मूंह मोड़ना चहिए और स्वर्गीय आशीषों की तलाश करनी चहिए।

आज पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाने की इच्छा रखने वाले लोगों के साथ समस्या यह है कि वे अभी भी सांसारिक आशीषों की लालसा रखते हैं। शैतान ऐसे लोगों को एक नकली अनुभव दे देगा जो आत्मा में बपतिस्मा पाने की तरह लगेगा। कई धर्मों के ऐसे लोग हैं जो अन्य-भाषाएँ बोलते हैं! तो हम कैसे सच से नकली का भेद कर सकते हैं? केवल तभी, जब हम सांसारिकता से फिर कर और स्वर्गीय की तलाश करेंगे।

पवित्र आत्मा के हर वरदान की नक्ल की जा चुकी है। यह केवल इस बात का प्रमाण है कि आत्मा का वास्तविक वरदान बहुत कीमती होता है। कोई भी बेकार सामान जैसे भूरे रंग के कागज और अखबार आदि की नक्ल नहीं बनाता? लोग उन्हीं चीजों की नक्ल करते हैं जो कीमती होती हैं जैसे हीरा, सोना या रुपयों की। इसीलिए वास्तविक अन्य-भाषा,भविष्यवाणी और चंगाई आदि का वरदान भी कीमती ही होगा! जभी तो शैतान ने इनकी नक्ल तैयार कर ली हैं।

यदि आप हीरे खरीदने जाएँ, लेकिन यदि हीरे के बारे में कुछ भी नहीं जानते, तो आप को यह पता है कि आपको आसानी से धोखा दिया जा सकता है। तो आप किसी ऐसे व्यक्ति को साथ ले जाएंगे आप जो हीरे के बारे में सब जानता हो। जब इस तरह की सांसारिक बातों में, आप इतनी सावधानी बरतते हैं। तब स्वर्गीय वरदानों के लिए क्या आपको और अधिक सावधान नहीं होना चाहिए - ताकि आप सुनिश्चित कर सकें कि शैतान आपको कुछ तुच्छ नकली वरदानों द्वारा धोखा ना दे? क्या आप ने पवित्र आत्मा और आग में वास्तविक बपतिस्मा प्राप्त किया था? जो वरदान आपके पास हैं - क्या वे सभी पवित्र आत्मा के वास्तविक वरदान हैं? ये वो महत्वपूर्ण सवाल है जिन्हें आपको अपने आप से पूछने चाहिए।

मुझे याद है जब मैंने पहली बार आत्मा में बपतिस्मा पाने की इच्छा और प्रार्थना की थी। मैं एक ऐसी कलीसिया में चला गया जो इसका प्रचार कर रहा था - और मैंने वहां बहुत से लोगों को ऊँचे स्वर में बोलते हुए सुना। यह अव्यवस्थित सा लग रहा था। और वहाँ के पासवानों को मेरे पैसे लेने में अधिक रुचि थी, क्योंकि वे जानते थे कि मैं नौसेना में एक अधिकारी था। मैं निराश होकर अपने कमरे में लौट आया और यह कहते हुए प्रार्थना की, "हे प्रभु,, जो उन लोगों के पास है उसे मैं नहीं पाना चाहता, मैं ऐसी आत्मा नहीं चाहता जो मुझे ऊँचे-ऊँचे सवार में बोलना सिखाए और फिर मुझे धन-प्रेम की ग़ुलामी में डाल कर छोड़ दे। मैं वह प्राप्त करना चाहता हूँ जो पिन्तेकुस्त के दिन पतरस, याकूब और यूहन्ना को मिला था - जिसने उन्हें इस दुनिया से मुक्त कर दिया था और उन्हें आप के लिए ज्वलंत गवाह बनने का सामर्थ दे दिया था। मुझे एक तुच्छ और नकली अनुभव नहीं चाहिए। और यदि सच्ची आत्मा प्राप्त करने के लिए मुझे 10 साल और लगते हैं, तो मैं 10 साल और प्रतीक्षा करूंगा"।

कल्पना कीजिए कि बालवाड़ी में पड़ने वाला एक महत्वाकांक्षी बालक पीएचडी (PhD.) प्राप्त करने के लिए 20 साल भी प्रतीक्षा करने के लिए कैसे तैयार रहता है। क्या पवित्र आत्मा के सामर्थ को प्राप्त करना एक पीएचडी प्राप्त करने से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है? जैसे एक पीएचडी प्राप्त करने के लिए आपके पैसे लगते हैं, वैसे पवित्र आत्मा पाने के लिए आपके पैसे नहीं लगेंगे, लेकिन वह आपको परमेश्वर के लिए उस पीएचडी से कहीं अधिक उपयोगी बना देगा।

आप सभी नए जन्म पाए मसीहियों से मैं एक सीधा प्रश्न पूछता हूँ: "क्या आपकी रुचि केवल स्वर्ग में जाने की ही है, या स्वर्ग जाने से पहले यहाँ पृथ्वी पर यीशु मसीह का अनुसरण करने में भी आपकी रुचि है?"

जब प्रभु ने मुझे पवित्र आत्मा से भरा, तब मैं ये नहीं चाहता था कि भारत के चारों ओर यह देखने जाऊँ कि कौन ऐसे लोग हैं जो स्वर्ग जाने में रूचि रखते हैं, परन्तु मैंने उन लोगों की खोज करने का फैसला किया जो यहाँ पृथ्वी पर यीशु के पीछे चलना चाहते हैं। भारत में एक अरब से अधिक ऐसे लोग हैं जो स्वर्ग जाना चाहते हैं। मैं आज तक oकिसी ऐसे व्यक्ति से नहीं मिला जो नरक में जाना चाहता हो! बस इसलिए आप आध्यात्मिक नहीं हो जाते क्योंकि आप स्वर्ग जाना चाहते हैं। हर एक इंसान स्वर्ग जाना चाहता है।

मैं उन लोगों की खोज में हूँ, जो पृथ्वी पर यीशु मसीह का अनुसरण करें, और जो स्वर्ग में जाने से पहले, अपना जीवन पूरी तरह से उसी के लिए जिएँ। मैं जानता हूँ कि ऐसे बहुत थोड़े ही लोग हैं - लेकिन दुनिया के कई भागों में ऐसे लोगों की तलाश में मैंने पिछले 37 वर्षों लगाएँ हैं। मैं ऐसे मसीहियों को नहीं ढूँढ रहा हूं जो प्रथ्वी के राज्य की लालसा रखते हों और फिर भी पवित्र आत्मा से भरने की इच्छा रखते हों। नहीं। मैं उन्हें ढूँढ रहा हूं जो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले की बुलाहट के प्रतिउतर में सांसारिक बातों से 180 डिग्री मुड़ कर स्वर्गीय बातों की ओर मुंह कर लेना चाहते हैं। मैं ऐसे मसीहियों को ढूँढ रहा हूं जो पैसे से अधिक पवित्रता की इच्छा रखते हैं।

आप में से कितने हैं जो आज परमेश्वर के सामने खड़े होकर यह कह सकते हैं, "हे प्रभु, मुझे पता है कि यहाँ इस पृथ्वी पर रहने के लिए मुझे पैसे की जरूरत है। लेकिन मैं जनता हूँ कि आपकी उपस्थिति में रहने के लिए मुझे पवित्रता प्राप्त करने की जरूरत है। तो हे प्रभु, आज मैं पैसे से अधिक पवित्रता को पाना चाहता हूँ। मैं अपने जीवन में दुनिया के धन और सभी प्रकार के आदर-सम्मान से अधिक परमेश्वर की अग्नि को प्राप्त करना चाहता हूँ"।

यदि आप इस तरह ईमानदारी से प्रार्थना करते हैं, तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आप बहुत जल्द ही पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पा लेंगे।

मुझे याद है एक व्यक्ति ने मुझे यह बताया था कि वह पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाने के लिए 40 साल से प्रार्थना कर रहा था, लेकिन उसने इसे प्राप्त नहीं किया था। उस के लिए मेरा उत्तर यह है: यदि आप पृथ्वी की बातों की लालसा रखेंगे, तो आत्मा का वास्तविक बपतिस्मा आपको 100 साल में भी नहीं मिलेगा। आप को किसी मीटिंग में शायद कुछ सस्ता नकली अनुभव मिल सकता है और आप उससे संतुष्ट भी हो सकते हैं, लेकिन आपको वास्तविक बपतिस्मा नहीं मिलेगा। वास्तविक बपतिस्मा पाने के लिए आपको एक कीमत अदा करने पड़ेगी।

अपने वचन में परमेश्वर ने हमें कई अद्भुत प्रतिज्ञाएँ दी है। जैसा कि मैंने कहा, इन्हें 'महान और बहुमूल्य वरदान' कहा जाता है (2 पतरस 1:4)। लेकिन सभी प्रतिज्ञाओं के साथ एक आवश्यक शर्त जुडी है। जब आप एक नौकरी के लिए आवेदन पत्र भरते हैं तो उस काम के लिए पहले आप को कुछ शर्तों को पूरा करना पड़ता है। कुछ मामलों में आप से कॉलेज से स्नातक प्राप्त होने की अपेक्षा की जाती है, या कुछ वर्षों का अनुभव माँगा जाता है। यदि उन शर्तों को पूरा करने के बिना आप नौकरी के इंटरव्यू के लिए चले जाएंगे तो इंटरव्यू लेने वाले आपसे पूछेंगे, "तुमने यहाँ आ कर अपना समय बर्बाद क्यों किया है? क्या आप ने आवश्यक योग्यताओं के बारे में नहीं पढ़ा? वापस घर चले जाओ"।

तो यदि आप यीशु के पास आते हैं, और कहते हैं कि "हे प्रभु, मुझे पवित्र आत्मा और आग में बपतिस्मा दे- जो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने कहा था कि आप प्रदान करोगे" वह कहेंगे, "क्या तुमने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले द्वारा बतायी गयी शर्तों को पढ़ किया है? क्या तुमने पूरी तरह से सांसारिक बातों को पाने की लालसा से मूंह मोड़ लिया है? क्या अब तुम स्वर्गीय चीजें के अभिलाषी हो गए हो?" अन्यथा, प्रभु तुमसे कहेंगे कि घर जाओ और जब शर्तों को पूरा कर लो तब तुम वापस आना। मुझे यकीन है कि अधिकांश मसीहियों को जिन्हें मैं पवित्र आत्मा से भरे होने का दावा करते देखता हूँ उनका अनुभव नकली है - क्योंकि मैं उनके जीवन में ना तो पवित्रता और ना ही सामर्थ देख पाता हूँ।

यीशु के केवल 11 शिष्य थे। वह सच में एक छोटा कलीसिया था। लेकिन जब वे पवित्र आत्मा के साथ भरे गए थे तो वे मसीह के कट्टर शिष्य बन गए और उन्होंने अन्य कई हजारों को शिष्य बना दिया। आज हमारे पास विशाल कलीसियाएं हैं, जो हजारों लोगों के पवित्र आत्मा के साथ भरे होने का दावा करती हैं। लेकिन वे पाप से हारे हुए हैं और धन के लोभी और सामर्थहीन हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका अनुभव नकली था। वह वास्तविक नहीं था।

एकबार मैंने एक कहानी सुनी थी एक मादा खरगोश की जो एक शेरनी से बात करते हुए कहती है, "पिछले साल मैंने 24 नन्हें खरगोशों को जन्म दिया था। तुमने पिछले साल कितने बच्चे जने हैं?" शेरनी ने कहा, "मैंने केवल एक ही को जन्म दिया - लेकिन वह एक शेर था!" जब भी मैं लोगों से उनकी कलीसिया में एक बड़ी संख्या के बारे में बात करते सुनता हूं जिन्हें "पवित्र आत्मा में बपतिस्मा" मिला है (जिसका वे दावा करते हैं) तो मैं उस कहानी के बारे में सोचता हूँ। उन हजारों खोखले 'अन्य्भाषा-बोलते' मसीहियों की तुलना में आरंभिक प्रेरितों के जैसा एक भी शिष्य आज परमेश्वर के लिए ज्यादा उपयोगी होगा।

मैं अन्य्भाषाओं में बोलने के वरदान का अवमूल्यन नहीं कर रहा हूँ। लेकिन आप कैसे पता लगा सकते हैं कि आपके पास अन्य्भाषाओं का वास्तविक वरदान है?

मैं 37 साल से अन्य्भाषाओं में बात करता आ रहा हूँ, और मैं आपको बता सकता हूँ कि इसने मेरे साथ क्या किया है। अन्य्भाषाओं में बात करने के 16 साल पहले मैं नया जन्म पाया मसीही बन चुका था। और उन सभी वर्षों में मैं अक्सर निराश, उदास, गुस्सा रहता था और मेरे खराब मूड के सीजन होते थे। कभी कभी मैं आनंद के शिखर पर खुशियाँ मना रहा होता था लेकिन ज्यादातर समय मैं मायूसी की घाटी में बैठा रहता था। मैं बस अधिकांश नया जन्म पाए मसीहियों की तरह ही था! तब मैंने 1 कुरिन्थियों 14:4 में पढा कि "जो अन्य-भाषा में बात करता हैं, वो अपनी ही उन्नति करता है"। खैर, मैं निश्चित रूप से स्वयं की उन्नति चाहता था। उन्नति का मतलब "निर्माण करना" है। अगर कोई इस इमारत में एक बम फैंक दे तो इसके टुकड़े -टुकड़े हो जाएंगे। फिर कोई इसका दोबारा निर्माण करे, तो यह एक सुंदर 'भवन' बन जाएगा - मतलब सुंदर, भव्य रंग-रूप वाला एक भवन। तो "स्वयं की उन्नति" करना एक भवन के निर्माण करने के समान है। "जो अन्य-भाषा में बात करता हैं, वह स्वयं को सुंदर रंग-रूप में निर्माणित करता है"। यह अनुवाद मुझे पसंद है।

तो मैंने प्रभु से पूछा कि, "हे प्रभु, क्या आप वास्तव में मेरे इस टूटे हुए, विश्वासहिन जीवन को फिर से नया बना सकते हैं? मैं नया जन्म पा चुका हूँ, लेकिन अक्सर मेरा मूड खराब रहता है। जब मैं गुस्सा हो जाता हूँ तो अपनी जुबान पर नियंत्रण नहीं रख पाता हूँ और मैं खुद को शैतान की तरह बात करते देखता हूँ। क्या आप वास्तव में मुझे एक स्वर्गीय भाषा दे सकते हैं? क्या आप सच में मुझे कुछ सुंदर रूप दे कर बना सकते हैं? यदि हां, तो मैं चाहता हूँ कि आप मुझे में ऐसा करें - किसी भी कीमत पर"! मैं इतना हताश हो चुका था।

तब परमेश्वर ने फिर मुझे उनकी आत्मा के साथ भरा और मेरा जीवन पूरी तरह से बदल के रख दिया। उन्होंने ना केवल मुझे अन्य-भाषा में बोलने का वरदान दिया था, साथ ही मुझे मातृ-भाषा नियंत्रित करने का सामर्थ भी दे दिया! इसी तरह मैं यह जान पाया था कि जो वरदान मैंने प्राप्त किय था वह वास्तविक था। यदि आप का एक अज्ञात भाषा में बोलने के वरदान को प्राप्त करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन अपनी ज्ञात जुबान पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं, तो तब आपका वरदान पवित्र आत्मा से बिल्कुल नहीं हो सकता।

मैंने तब यह भी पाया कि अब मैं निराशा और खराब मूड पर काबू पा सकता हूँ - और "प्रभु में हमेशा आनन्दित" रह सकता हूँ। मैं अब भी कभी-कभी हतोत्साहित होने की परीक्षा में पड़ जाता हूँ लेकिन मैं इसका विरोध करता हूँ और अन्य-भाषा में तब तक बोलता रहता हूँ जब तक यह भावना मुझसे दूर नहीं हो जाती। इस प्रकार अन्य-भाषा में बात करने का वरदान मुझे हमेशा तरोताज़ा रखता है जो मुझे खुश्क, बनने से रोकता है जिससे हर समय दूसरों के प्रति अपनी सेवकाई में मुझे आत्मा का अभिषेक मिल सके। और इसलिए मुझे लगता है कि आत्मा, के हर अन्य वरदान की तरह ही यह वरदान भी, हमें मुख्य रूप से दूसरों के लिए एक आशीष बनने के लिए मिला है।

लेकिन इन सब से बड़कर, जबसे मैं आत्मा से भरा गया तबसे प्रभु यीशु की उपस्थिति मेरे लिए वास्तविक बन गयी। अब मैं जान गया हूँ कि वह परमेश्वर जो मुझमें है, संसार में रहने वाले शैतान से महान है। इससे पहले, मैं दुष्टात्मा से ग्रस्त लोगों का सामना करने से डरता था। लेकिन अब मैं दुष्टात्मा बाहर निकालने द्वारा ऐसे लोगों की मदद कर सकता हूँ। एक समय मैं शैतान से डरता था। अब शैतान मुझसे डरता है।

मैं कोई विशेष व्यक्ति नहीं हूँ। लेकिन जब परमेश्वर ने मुझे पवित्र आत्मा से भरा तब मुझे असली, वास्तविक मसीहियत मिल गयी। मैंने यीशु को अपना सर्वस्व दे दिया है और अब पृथ्वी पर मेरी कोई महत्वाकांक्षा नहीं रह गयी है, अब मैं हर दिन परमेश्वर की इच्छा पूरी करना चाहता हूँ, उस दिन तक जब मैं अपने प्रभु, के रूबरु ना हो जाऊं।

जब मैं अपने चारों ओर उन अधिकांश मसीहियों के जीवन को देखता हूँ जो कहते हैं कि वे नए जन्म पाए मसीही हैं, तो मुझे ठीक वही स्थिति दिखती है जो नया जन्म पाने के बाद उन 16 वर्षों के दौरान मेरी थी। मैं ऐसे मसीहियों को तुच्छ नहीं समझता और ना ही मैं उन से घृणा करता हूँ। मैं यह कैसे कर सकता हूँ? मैं भी एक बार बिल्कुल उनकी तरह ही तो था। मैं केवल उनसे यह कहता हूँ, "परमेश्वर के पास आप के लिए कुछ बेहतर है। सांसारिक बातों की लालसा से मूंह मोड़ कर और स्वर्गीय चीजों को प्राप्त करने की अभिलाषा रखो। तब यीशु आप को उनकी आत्मा से भर देंगे। नई वाचा का जीवन पुरानी वाचा के जीवन से कई लाख गुना बेहतर है"।

यीशु हमें सांसारिक धन दौलत से अमीर बनाने के लिए नहीं आए थे, ना ही वे हमें इस दुनिया में या कलीसिया में - सम्मान दिलाने आए थे। वे हमें खुद उन्हीं के जैसे - प्रेम करने वाले, विनम्र और पवित्र व्यक्तित्व में ढालने ढालने आए थे। इसके साथ ही, वे तुच्छ समझा जाने और मनुष्यों द्वारा त्यागे जाने की अनुमति भी हमें देंगे जैसा उनके साथ हुआ था। वे हमें सांसारिक वस्तुओं में दरिद्र होने तो दे सकते हैं, लेकिन आत्मिक रूप से धनी बनाते हैं।

जिस परमेश्वर ने इब्राहीम, अय्यूब और दाउद और सूलेमान को सांसारिक धन दौलत देकर, धनी बनाया, यदि वे चाहते तो बड़ी सरलता से यीशु और पतरस और पौलुस को भी सांसारिक संपत्ति से धनवान बना सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया - क्योंकि यीशु मनुष्य के लिए स्वर्ग के राज्य को खोलने के लिए और उसे स्वर्गीय धन दौलत देने के लिए आए थे। और इसलिए पौलुस (2 कुरिन्थियों 6:10) में अपनी दशा का वर्णन इस तरह से करते हैं: "कंगालों के जैसे है, परन्तु बहुतों को धनवान बना देते हैं, ऐसे हैं जैसे मानो हमारे पास कुछ भी नहीं तो भी सब कुछ रखते हैं"। यही तो नई-वाचा, की आत्मा-परिपूर्ण सच्ची मसीहियत है।

क्या आप आज स्वर्ग से आती एक आवाज सुन पा रहे हैं? यह एक बहुत प्रेम भरी आवाज है। प्रभु कहते हैं, "हे मेरे बेटे, हे मेरी बेटी ऊँचे पर आजा। मैं नहीं चाहता कि जिस निम्न स्तर पर तू अभी भी रह रहा है, उसी में बने रह। इस बात से खुश मत होना कि तू अपने आसपास के अन्य मसीहियों की तुलना में बेहतर है। अपने ज्ञान, या अपने अनुभवों का या तुम्हारे प्रति दूसरों की अच्छी राय का या इस सोच पर कि मैं कितना आत्मिक बन गया हूँ, इन सब पर गर्व matmatmatमत करना। उस बात पर भी आनन्दित मत होना कि तू मेरे द्वारा अतीत में कितना इस्तेमाल किया गया है। ऊँचे पर आजा"।

परमेश्वर आप को उनकी पवित्र आत्मा के साथ भरना चाहते हैं। क्या आप उनसे कहेंगे, "हे प्रभु, मैं पवित्र आत्मा के वास्तविक सामर्थ को चाहता हूँ। नकली के साथ मैं बहुत जी चुका।

एक और बात मैं आपके बताना चाहता हूँ: आप को प्रतीक्षा करने कोई कोई जरूरत नहीं है। अगर प्रतीक्षा की घड़ी है भी, तो वो इसलिए है कि परमेश्वर चाहते हैं कि आप सब कुछ को उन्हें समर्पित कर दो - अपना सारा जीवन और अपनी सब महत्वाकांक्षाएं, आदि, शायद अभी भी आपके जीवन में कुछ ऐसा है जिसे आपने उसे अभी तक नहीं दिया है, आपके दिल का कोई ऐसा दरवाजा जिसे अपने प्रभु के लिए नहीं खोला है, कोई ऐसी लत जिसे अभी भी आप छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। क्या अभी आप इसे छोड़ देने के लिए तैयार हैं?

क्या आप उस डीवीडी-फिल्म को फेंक देने के लिए तैयार हैं जिन्हें आप अपने साथ बैठ कर यीशु को दिखाना नहीं चाहते? क्या आप उन रॉक-संगीत की सीडी को फेंक देने के लिए तैयार हैं जिन्हें यीशु कभी नहीं सुनेंगे? क्या आप उन चित्रों और पत्रिकाओं को फेंक देने के लिए तैयार हैं जिन्हें आप यीशु के देख लेने पर शर्मिंदा हो जाएँगे? आप यीशु को अपने आर्थिक मामलों की जांच करने देंगे और उन्हें आपको यह सलाह देने देंगे कि आपको अपने धन का उपयोग कैसे करना चाहिए? क्या आप यीशु को अपने और अपनी पत्नी के बीच रखने को तैयार हैं जिससे हर बार जब आप उनसे बात करें, तब आप ऐसे बात करें कि मानो यीशु ही सामने खड़े हों? और यदि आप एक पत्नी हैं तो ऐसा ही अपने पति के साथ करने को तैयार हैं?

यदि इस तरह का जीवन आप चाहते हैं तो, मैं आपको बता सकता हूं, कि आप पवित्र आत्मा के साथ आज ही भरे जा सकते हैं।

लेकिन यदि अब भी आप पृथ्वी की बातों की लालसा कर रहे हैं और यीशु से एक बेहतर घर और एक बेहतर कार और ऐसी ही अन्य बातों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं तो मैं आपसे यह कहना चाहूँगा कि प्रभु के पास आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है, जब तक आप मन-फिराव कर अपना मूंह इन बातों से ना मोड़ लें।

यह देख पाने में और बुद्धिमान बनने में प्रभु आप की मदद करें!

आमीन।