द्वारा लिखित :    जैक पूनन श्रेणियाँ :   चेले
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गलातियों के 5:1 में पौलुस कहते है कि मसीह हमें मुक्ति दिलाने के लिए आए थे । इसलिए हमें किसी को भी यह अनुमति नहीं देनी चाहिए कि वे पुनः हमें व्यवस्थाओं के बंधन में डाल दे। हमें कभी भी किसी समूह या कलीसिया के द्वारा बनाए गए परम्पराओं और व्यवस्थाओं के आधीन नहीं होना चाहिए। उसी समय पर, हमें अपने स्वतंत्रता का उपयोग पाप करने के एक बहाने के रूप में नहीं करना चाहिए (गला. 5:13)। कई विश्वासी अनुग्रह को गलत रीति से समझते है और मसीही स्वतंत्रता को भी और उनका अंत व्यवस्था के अंतर्गत जीवन से अधिक दुष्टतर होकर - वे अपने शरीर के दास के रूप में रहते हैं । व्यवस्था से मुक्ति पाने का एक ही सही मार्ग है और वह पवित्र आत्मा के नेतृत्व में चलना है। अन्यथा हम व्यवस्था की तुलना में नीचे उतरकर पाप में रहने लगते है। लेकिन यदि हम आत्मा के अग्रणी के अनुसार चलते हैं, तो हम शरीर के स्तर तक नहीं उतरेंगे। केवल ऐसे विश्वासी ही व्यवस्था से मुक्त होने का दावा कर सकते हैं (गला. 5:16,18)। तो एक विश्वासी के जीने का तीन स्तर होता हैं:

1. आत्मा द्वारा नेतृत्व (उच्चतम - नई वाचा का स्तर); या

2. व्यवस्था के नेतृत्व में (पुरानी वाचा का स्तर); या

3. शरीर के नेतृत्व में (सबसे नीचा स्तर)।

जीवन के इन तीन स्तरों को एक इमारत की तीन मंजिलों के रूप में देखे। यदि आप तीसरी मंजिल पर नहीं रहते है (आत्मा के नेतृत्व पर), और आप दूसरी मंजिल (व्यवस्था के नेतृत्व) को नष्ट कर देते है, आप पहले मंजिल पर उतर जाएंगे (शरीर के नेतृत्व पर)। यदि आप यह कहते हैं, "मैं व्यवस्था का नेतृत्व नहीं कर रहा हूँ, क्योंकि यीशु ने व्यवस्था को समाप्त कर दिया है," तो यह बेहतर होगा कि आप आत्मा का नेतृत्व करे। अन्यथा, आप शरीर के स्तर पर उतर जाएंगे। विश्वासियों की भीड़ के साथ यही हुआ है। उन्होंने गलातियों में पढ़ा है कि हम व्यवस्था के अंतर्गत नहीं हैं। लेकिन वे आत्मा की अग्रणी के अनुसार नहीं जीते। परिणामस्वरूप वे शरीर के अनुसार जीते हैं। यही कारण है कि हम आज के मसीही अगुवों को व्यवस्था के अंतर्गत लोगों की तुलना में अधिक बुरे काम करते हुए देखते है। वे विश्वासी जो यह कहते हैं कि वे अनुग्रह के भीतर है कैसे अपने शरीर के अभिलाषाओं के अनुसार जी सकते है? क्योंकि उन्होंने व्यवस्था को दूर फेंक दिया है। "यदि आप आत्मा का नेतृत्व कर रहे हैं तब ही व्यवस्था के आधीन नहीं है (गला. 5:18)। व्यवस्था उनके लिए आवश्यक है जो पवित्र आत्मा का नेतृत्व नहीं करना चाहते हैं।

गलातियों में यह संदेश नहीं है कि "व्यवस्था को दूर फेंक दें।" वह यह है, " व्यवस्था को तब ही दूर फेंकें जब आप आत्मा में एक जीवन में आ चुके हैं।" पवित्र आत्मा यह स्पष्ट करते है कि शरीर में जीना क्या होता है (गला. 5:19-21): व्यभिचार, मूर्ति पूजा (पैसो और मानव की पूजा),बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध,विरोध, फूट, विधर्म, आदि। क्या यह केवल अविश्वासियों के बीच पाए जाते हैं? नहीं। यहा तक कि तथाकथित "विश्वासी" भी इन पापों में लिप्त हैं। क्यों? क्योंकि वे पवित्र आत्मा में एक जीवन में प्रवेश करने से पहले ही व्यवस्था को दूर फेंक देते है। ऐसे लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस नहीं होंगे (गला. 5:21)। दूसरी ओर, जो लोग आत्मा के द्वारा नेतृत्व कर रहे हैं अपने जीवन में प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम को लेकर आएंगे (गला. 5:22,23)। यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।