द्वारा लिखित :    जैक पूनन श्रेणियाँ :   कलीसिया
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एक नए-वाचा के कलीसिया के पहचान की एक निशान यह है कि इसके बीच में परमेश्वर की उपस्थिति है। जब भविष्यवाणी की आत्मा एक कलीसिया के बैठक में सामर्थ के साथ उपस्थित होती है, तब उस बैठक में आने वाले लोग उपने चेहरे पर गिरकर "यह स्वीकार करते हैं कि परमेश्वर वहां उपस्थित है" (1 कुरिन्थियों 14:24,25)। जब यीशु कलीसिया में भविष्यवाणी बोलते है, हमारे हृदय जलने लगेंगे, जिस प्रकार इम्माऊस के रास्ते पर उन दो चेलों के हृदय जलने लगे थे, जब यीशु ने उनसे बात की (लूका 24:32)।

परमेश्वर भस्म करने वाले आग है। जब परमेश्वर उस झाड़ी के माध्यम से आए जिसके द्वारा उन्होंने मूसा से बात की, और वह झाड़ी जल गई, और उस झाड़ी में कोई कीड़ा जीवित नहीं रह सका। ठीक उसी प्रकार, कोई भी पाप वहां छिपा नहीं रह सकता जहां सामर्थी परमेश्वर की उपस्थिति आज जलते हुए आग के समान पाया जाता है। इस प्रकार की कलीसिया ही एक नए वाचा की कलीसिया है। यीशु की आंखे आग की ज्वाला के समान है (प्रकाशित 1:14)। और वे निरंतर सभी कलीसियों में पापों को खोजकर उसे स्पष्ट कर रहे है और साथ ही मानव परंपराओं को और फरीसी बनने को भी, उन कलीसियों में जिनका उन्होनें निर्माण किया है।

स्वर्ग के राज्य के लिए मूलधन कुंजी मन की दीनता हैं (मत्ती 5:3)। इसके बिना, हम एक नए-वाचा की कलीसिया का निर्माण करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे। मन की दीनता यह है कि हम परमेश्वर के सामने, हमारे अपने आवश्यकता की भावनाओं के साथ निरंतर टूटे हुए रहेंगे, क्योंकि हम में एक महान और तीव्र लालसा है संपूर्णता को ग्रहण करने के लिए जैसे हमारे स्वर्गीय पिता संपूर्ण है। " परमेश्वर टूटे मन वालों के समीप रहता है" (भजन. 34:18)। और जब वे निकट होते है, उनकी उपस्थिति हमारे हृदय में स्वर्ग के आग को लेकर आती है और हमारे माध्यम से दूसरों को भी, जहाँ भी हम जाते है।

एक नए-वाचा की कलीसिया में, कई लोग वचन के प्रचार से अपमानित होंगे और कलीसिया को छोड़ देंगे। यरूशलेम के कलीसिया के विषय में यह लिखा है, कि "बहुत से लोगों में उसमें शामिल होने की हिम्मत न हुई" ( प्रेरितों. 5:13)।

जब यीशु की उपस्थिति एक कलीसिया में सामर्थ के साथ उपस्थित होती है, वहाँ उनके चेले उनकी महिमा को ही देखना चहेंगे। हमने वास्तविक रूप में पुनरूत्थित प्रभु की महिमा देखी है, इसका प्रमाण यह है कि पृथ्वी की बातें (आराम और सम्मान और धन) हमारे आँखों में मंद बन गई होगी, और ये हमें आकर्षित नहीं कर पाएंगे जैसा पहले किया करते थे।

एक नए-वाचा की कलीसिया में, केवल वचन का सामर्थी उपदेश ही नहीं होगा लेकिन साथ ही वचन के जीवित उदाहरण भी होंगे। वह नए सिद्धांत नहीं है जो परमेश्वर के प्रति दूसरों को प्रभावित करते है, लेकिन वह पवित्र जीवन है जो दूसरों को प्रभावित करते है। नई वाचे के सेवक केवल दूसरों को उपदेश ही नहीं दिया करते, वे अन्य लोगों को उनके उदाहरण का अनुसरण करने के लिए भी आमंत्रित करते है (1 कुरिन्थियों 11:1)। हमें रोना चाहिए जब हम एक योग्य उदाहरण नहीं है। हमें शर्म के साथ हमारे सिरों को लटकाना चाहिए जब हम सूखी, अभिषेक रहित संदेशों से लोगों को उबा रहे हैं। यदि हम यीशु का पालन करते है तो ठंड या फरीसी बनना असंभव है। हम यीशु से बहुत दूर हैं यदि हमारे पास लोगों को खिलाने के लिए केवल सपने और दर्शन ही हो और न कि परमेश्वर से कोई वचन। दूसरों को उबाना असंभव होगा, जब तक हम में परमेश्वर के लिए आग बना हुआ हैं।

यीशु को मरे हुओं में इस कारण उठाया गया था कि हर चीज में उनका प्रथम स्थान हो (कुलु.1:18)। जो इस महत्वाकांक्षा को रखते है, परमेश्वर पूर्ण रूप से उनके साथ रहते है। इसका यह अर्थ है कि हम अपने योजनाओं और अधिकारों को पूर्ण रूप से त्याग दे और यीशु को अनुमति दे हमें बताने के लिए कि हमें क्या करना चाहिए, कैसे अपने पैसों और समय आदि का खर्च करना चाहिए। यदि आपके जीवन की भी यही महत्वाकांक्षा है, तो आप निश्चित हो सकते है कि परमेश्वर आपका उपयोग आपके इलाके में एक नए-वाचे की कलीसिया के निर्माण करने के लिए करेंगे।

कई लोगों यह दावा करते है कि क्योंकि वे यीशु का नाम लेते है इस कारण से वे उनके बीच में है (मत्ती 18:20)। लेकिन वे अपने आपको धोखा दे रहे हैं। यदि वास्तविक रूप में वे वहां उपस्थित है तो क्यों उनकी बैठक इतने उबाऊ हैं? ऐसा क्यों नहीं हो रहा है कि वहां जीवन में बदलाव आए? एक वास्तविक धर्मी व्यक्ति के संगठन में यदि हम थोङा समय भी बिताते है, इससे हम ऐसे प्रभावित होते है यहां तक कि हमारे जीवन के पाठ्यक्रम में ही परिवर्तन आ जाती है। इससे कितना अधिक प्रभाव हमारे जीवन पर होना चाहिए, यदि हम ने स्वयं यीशु के साथ अपना थोङा सा समय ही बिताया हो।

तो यदि कलीसिया के बैठकों के माध्यम से जीवन में बदलाव नहीं आ रही है, तो हमें स्वीकार करना होगा कि परमेश्वर की उपस्थिति हमारी बैठकों में नहीं है। तो फिर हम एक नए वाचा की कलीसिया नहीं हैं।